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Saturday, March 23, 2019

वायुसेना के बेड़े में शामिल होगें चिनूक हेलिकॉप्टर, उंचाई वाले इलाकों में उठाएंगे भारी वजन

भारतीय वायुसेना के बेड़े में अब तक रूसी मूल के भारी वजन उठाने वाले हेलिकॉप्टर ही रहे हैं लेकिन यह पहली बार होगा कि वायुसेना को अमेरिका द्वारा निर्मित हेलिकॉप्टर मिलेंगे।


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की ताकत में सोमवार को इजाफा होने जा रहा है। एरोस्पेस की अमेरिकी कंपनी बोइंग द्वारा बनाए गए चिनूक सीएच-47आई हेलिकॉप्टर को भारतीय वायुसेना के बेड़े में 25 मार्च को चंडीगढ़ में शामिल किया जाना तय हुआ है। इस मौके पर एक इंडक्शन समारोह का आयोजन वायुसेना करने जा रही है। सीएच-47 चिनूक एक एडवांस्ड मल्टी मिशन हेलिकॉप्टर है, जो भारतीय वायुसेना को बेजोड़ सामरिक महत्व की हेवी लिफ्ट क्षमता प्रदान करेगा। यह मानवीय सहायता और लड़ाकू भूमिका में काम आएगा। उंचाई वाले इलाकों में भारी वजन के सैनिक साज सामान के परिवहन में इस हेलिकॉप्टर की अहम भूमिका होगी।
भारतीय वायुसेना के बेड़े में अब तक रूसी मूल के भारी वजन उठाने वाले हेलिकॉप्टर ही रहे हैं लेकिन यह पहली बार होगा कि वायुसेना को अमेरिका द्वारा निर्मित हेलिकॉप्टर मिलेंगे। चिनूक बहुउद्देशीय, वर्टिकल लिफ्ट प्लेटफॉर्म हेलिकॉप्टर है जिसका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों, उपकरण और ईधन को ढोने में किया जाता है। इसका इस्तेमाल मानवीय और आपदा राहत अभियानों में भी किया जाता है। राहत सामग्री पहुंचाने और बड़ी संख्या में लोगों को बचाने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। बता दें कि इसमें पूरी तरह एकीकृत डिजिटल कॉकपिट मैनेजमेंट सिस्टम है। इसके अलावा इसमें कामन एविएशन आर्किटेक्चर काकपिट और एडवांस्ड काकपिट प्रबंध विशेषताएं हैं।
इस हेलिकॉप्टर का दुनिया के कई भिन्न भौगोलिक इलाकों में काफी सक्षमता से संचालन होता रहा है। चिनूक हेलिकॉप्टर अमेरिकी सेना के अलावा कई देशों की सेनाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। खासकर हिंद उपमहाद्वीप के इलाके में इस हेलिकॉप्टर की विशेष उपयोगिता होगी।
गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना ने 15 चिनूक हेलिकॉप्टर को हासिल करने का आर्डर दिया था जिसमें से पहला चिनूक हेलिकॉप्टर इस साल फरवरी में आया था। सितंबर 2015 में भारत के बोइंग और अमेरिकी सरकार के बीच 15 चिनूक हेलीकॉप्टर्स खरीदने को लिए करार किया गया था। अगस्त 2017 में रक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय सेना के लिए अमेरिकी कंपनी बोइंग से 4168 करोड़ रुपये की लागत से छह अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर, 15 चिनूक भारी मालवाहक हेलीकॉप्टर अन्य हथियार प्रणाली खरीदने के लिए मंजूरी प्रदान की थी।

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